Monday, December 22, 2008

छात्राओं के लिए प्रश्नपत्र



नोट- किन्ही दस प्रश्नो के उत्तर दो। अन्तिम प्रश्न अनिवार्य है ?
1 कभी-कभी रसोईघर में स्टोव क्यों फट जाता है और उससे बहुएँ ही क्यों जलती है । घबराएँ नहीं , और सही उत्तर दें ?
2 कई बार ऐसा होता है कि ससुराल मे बहू की लाश पंखे से झूलती नजर आती है; क्यों? यह सीन आप में डर पैदा करता है या क्रोध. कारण सहित उत्तर दो ।
3 अक्सर ऐसा होता है कि बहू की पीठ पर निशान नजर आते है। ये निशान किस के घोतक है ? इसका इलाज बता सकते हो तो बताओ।
4 ससुराल वालों के ताने सुनने में जो बहू दक्ष होती है यानि सुनी को अनसुनी कर देती है, फायदे मे रहती है इस बारे में आपकी राय क्या है, स्पष्ट लिखो ।
5 जो बहुएँ अपमान सह सकने की हिम्मत रखती है उन्हें हम साहसी महिला कहेंगे । सही या गलत ।
6 बहू को ससुराल में सम्मान कब मिलता है? जब वे अपने साथ ,,,,,,,,,,,, लाएँ । खाली जगह भर कर बताओ कि बहुओं को ससुराल में सम्मान मिलता भी है या नहीं ।
7 बहू के लिए सबसे बडा विलेन कौन होता है ? पति,सास,ससुर,ननद, देवर या जेठ ।
8 क्या कारण हैं कि सास बहुओं के आगे झूठे बर्तनों और गंदे कपडों का ढेर लगा देती है और दिन में तीन बार पौंछा लगवाती है?
9 पति नाम का जन्तु अक्सर घुग्घु क्यों बन जाता है , कारण सहित उत्तर दो ।
10 सास ,ससुर ,देवर,ननद और पति के पारिवारिक सहयोग का एक क्रूर व वीभत्स उदाहरण दो।
नहीं मालूम हो तो अखबार पढो ।
11 विवाहोपरांत अगर तुम्हारे साथ कोई हादसा हो जाय तो तुम ससुरालवालो या पीहर वालो को कोसोगी या कोई कदम उठाओगी । बताओ वह कदम कौन सा होगा ?
12 नारियों से संबंधित जितने कानून है वे सरल रुप में दसवीं के कोर्स में लगाए जाएँ अथवा अशोक महान और शाहजाहाँ को ही पढा जाय । अपने विचार लिखो ।
13 कौन सा लडका तुम्हारी पहली पसंद होगा 1) इंजीनियर 2) अध्यापक 3) क्लर्क ,4दहेज विरोधी । निस्सकोंच जवाब दो । साथ में यह भी बताओं की सबसे हाइ रेट किस की होगी?
१४ घर में गैस के दो-दो कनेक्श्न होने पर भी राशन कार्ड पर सास मिट्टी का तेल क्यों मंगवाती है।

7 comments:

संगीता पुरी said...

अच्‍छा लिखा है...सामान्‍य ज्ञान के ये प्रश्‍न जितने आसान लग रहे हें , उनका जवाब देना उतना ही मुश्किल है।

लावण्यम्` ~ अन्तर्मन्` said...

बेटीयाँ माता ,पिता के ह्र्दय का टुकडा होतीँ हैँ और बेटे भी !
इन्द्रा नूयी पेप्सीको की सी ई ओ बन गईँ तब भी अमरीकी मीडीया ने भी
प्रश्न किया कि "आप घर परिवार और करीयर सब किस तरह सँभालतीँ हैँ ?"
तो स्त्री ही है जो माँ बनती है और बच्चोँ की परवरिश मेँ, स्त्री की भूमिका
हमेशा पुरुष से कुछ परसेन्ट ज्यादा ही रहती है ये भी एक नैसर्गिक सत्य है
आगे चलकर, कन्या का विवाह तथा उसका परिवार कैसा होगा, कन्या, खुद
एक नवविवाहीता तथा आगे चलकर माता के रोल को किस तरह निभायेगी, या,
अपनी करीयर तथा परिवार का सँतुलन किस तरह रखेगी, इसकी शिक्षा भी तो
माता,पिता की उसी कन्या को दी गई तालीम, प्रोत्साहन और फिर कन्या के नये
परिवार के सभी के सपोर्ट पर भी निभता है - यहाँ ( अमरीकी, पास्चात्त्य देशोँ मेँ )
कई तरह की सुविधाएँ हैँ फिर भी, हर कन्या/ स्त्री के लिये, ये बहुत कठिन मार्ग
होता है और हम यही शुभकामना कर्ते हैँ कि २१ वीँ सदी की हर महिला, अपने,
चुने हुए जीवन पथ पर, सफलता से, सुखी पारिवारीक जीवन के अनुभव के साथ
आगे बढे,स्त्री के लिये सँघर्ष आज भी जारी है -- देश कोई भी हो, उमर और अवस्था
कोई भी हो, समाज परिवार जैसा भी हो, इसीलिये, मैँ हरेक स्त्री के सँघर्ष को खुले
ह्र्दय से सराहती हूँ - और आशा भी करती हूँ कि मृदुता और कोमलता जो स्त्री के ते
नैसर्गिक गुण हैँ वे कदापि ना मिटेँ -- और स्त्री व पुरुष का साझा जीवन, सुखमय
और सशक्त हो ताकि भविष्य के नये "परिवार और घर" उसी नीँव पर खडे होँ पायेँ
( बेटोँ को भी अच्छे सँस्कार व तालीम देना ये भी पिता, माता का अहम्` कार्य है )
बनिस्बत्` पुरुषोँ के व पुरुष भी
- लावण्या

Mired Mirage said...

भगीरथ जी, आपने बहुत जबर्दस्त व्यंग्य लिखा है। बहुत सरल भाषा व शैली में आपने हमारे इस ढोंगी समाज की कलई खोल दी है। जब आप जैसे लोग ये प्रश्न पूछने लगें तो लगता है कि हम सही दिशा की ओर जा रहे हैं चाहे गति बहुत धीमी ही है। आपको बहुत बधाई। आशा है भविष्य में भी ऐसा ही लेखन पढ़ने को मिलता रहेगा।
आज आपका लेख पढ़कर मुझे काफी पहले लिखे अपने एक लेख की याद आ गई और मैंने उसे पोस्ट कर दिया। लिंक आपकी पोस्ट के नीचे ही दिया हुआ है। कृपया आकर पढ़िएगा।
धन्यवाद।
घुघूती बासूती

रचना said...

भगीरथ जी
hindi bloging mae is tarah kae laekho ko kament nahin miltey . yahaan kewal aur kewal usko kament diya jataa haen jo parivaar ki balivedi par aurat apnae aatm samaan ki parvaah naa karey topic par laekh likhtey haen

aap likhtey rahey kyukin log kament karey yaa naa kare padhegae jarur par sach ko maanegae nahin ki aesa hota haen

Neeraj Rohilla said...

प्रश्न नंबर १३ वें में इंजीनियरों का मार्केट बहुत डाउन चल रहा है, :-)

असल में सभी प्रश्न जायज हैं । शिक्षा और नारी को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना ही एक विकल्प दिखता है ।

bahadur patel said...

apane vakai badhiya likha hai. badhai.

सुभाष नीरव said...

हम भी जानते हैं और आप भी कि आप ऐसा व्यंग्य लिख कर कहाँ और किस पर व्यंग्य कर रहे हैं? बहुत ही सटीक, धारदार व्यंग्य है। आपकी कलम को सलाम !