Friday, May 1, 2009

श्याम पोकरा के उपन्यास बेलदार का लोकार्पण

'शारदा' पत्रिका एवं 'बेलदार' उपन्यास का विमोचन
शारदा साहित्य मंच के तत्वाधान में दिनांक १९।०४.०९ को डा. भीमराव अम्बेडकर भवन , रावतभाटा में लोकार्पण समारोह का आयोजन किया गया । जिसमें मंच की वार्षिक पत्रिका ‘शारदा’ एवं श्री श्याम कुमार पोकरा के उपन्यास बेलदार का विमोचन कोटा के वरिष्ठ कथाकार श्री विजय जोषी , कवि श्री सोहन सिंह केलवा एवं वरिष्ठ लघुकथाकार श्री भगीरथ परिहार ने किया । श्री श्याम पोकरा ने कोटा से पधारे मुख्य अतिथि श्री विजय जोशी का परिचय देते हुए कहा कि श्री जोशी अच्छे कथाकार ही नहीं अच्छे समीक्षक भी हैं मेरा इनसे परिचय सन 1999 में दशहरा मेले में हुआ । उनसे मुझे काफी उर्जा इस क्षेत्र में मिली प्रसन्नता का विषय है कि वे आज इस समारोह में उपस्थित होकर ‘बेलदार’ उपन्यास का लोकार्पण करेंगे श्री दिनेश छाजेड़ ने शारदा साहित्य मंच का परिचय देते हुए कहा कि जो पौधा हमने पाँच वर्ष पूर्व लगाया था , वह अब बड़ा होकर वृक्ष बनने लगा हे । आज इस मंच की पत्रिका ‘शारदा’ का प्रवेशांक वरिष्ठ साहित्कारों द्धारा किया जा रहा है समारोह के मुख्य अतिथि एवं वरिष्ठ कथाकार श्री विजय जोषी ने सभा को सम्बोधित करते हुए कहा कि अणुनगरी में साहित्य के जलते दीपों कों देखकर मुझे अतिप्रसन्नता हो रही हे हर्ष व्यक्त करते हुए उन्होने कहा कि यह बड़े गौरव की बात है कि विज्ञान व तकनीकी से जुड़े लोग भी साहित्य में गहरी रूचि रखते हैं । मानव मन में उपजी संवेदनायें ही शब्द बनकर सृजन के रूप में प्रकट हो 'शारदा' जैसी पत्रिका के रूप में आकार ग्रहण करती है । अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए श्री विजय जोशी ने कहा कि श्याम पोकरा का उपन्यास ‘बेलदार’ मुखर संवेदनाओं का एक गम्भीर दस्तावेज है । इस कृति में उपन्यासकार ने बेलदार के रूप में एक ऐसे चरित्र को प्रस्तुत किया है जो नैतिक मूल्यों की रक्षा के लिए कठोर संघर्श का मार्ग अपनाता है । अपमान को सहन कर अन्याय का डटकर मुकाबला करता हे और अंत में अपने धैर्य व बुद्धि के बल पर सत्य को उजागर करने में सफल होता है । मुझे आषा है कि बेलदार एक कालजयी कृति का स्थान ग्रहण करेगा । अध्यक्षीय उद्बोधन देते हुए वरिश्ठ लघु कथाकार भगीरथ परिहार ने मंच की गतिविधयों व उपलब्धियों पर संतोश प्रकट किया । शारदा साहित्य मंच के प्रभारी श्री अरूण भट्ट ने कहा कि छोटे - छोटे दीपों से हम साहित्य का प्रकाष फेलाने का प्रयास कर रहे हैं । जिसका परिणाम प्रकाश पुंज बनकर ‘शारदा' पत्रिका के रूप में आपके सामने है । हरिओम षर्मा , रमाकान्त शर्मा , रिपेन्द्र सिंह , देव किशोर , अरूण भट्ट राम शंकर वर्मा , तेजपाल गुसाईवाल , दिनेश छाजेड़ ,सुरेश छाबड़ा , वीरेन्द्र सिंह , गोविन्द प्रसाद , हेमन्त आमेठा , एन. पण्डित , श्याम पोकरा , प्रदीप गुर्जर आदि कवियों ने अपनी रचनाऐं प्रस्तुत की अंत में मंच के सदस्यों द्धारा सभी अतिथियों एवं ‘शारदा' पत्रिका के सम्पादक श्री ओ. पी. आर्य का श्रीफल व शौल ओढ़ाकर सम्मान किया गया ।

सुरेश छाबडा(कुरते में.)अरूण भट्ट,सोहनसिंह केलवा,विजय जोशी,भगीरथ,
श्याम कुमार पोकरा व दिनेश छाजेड

3 comments:

दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi said...

श्री श्याम पोकरा को बहुत बहुत बधाइयाँ।

प्रदीप कांत said...

श्री श्याम पोकरा को हार्दिक बधाई

Anonymous said...

आदरणीय भगीरथ जी, आपको यहाँ पाकर अच्छा लगा . इधर यानी www.srijangatha.com पर भी कुछ लिख भेजें । पत्रिका को एक वरिष्ठ लघुकथाकार की रचनात्मक ऊर्जा मिलने से ख़ुशी होगी - मानस