Thursday, October 8, 2009

अन्तर्राज्यीय लघुकथा सम्मेलन 3 अक्टूबर 2009

अठारवां अन्तर्राज्यीय लघुकथा सम्मेलन 3 अक्टूबर 2009 , युवक साहित्य सदन, सिरसा , हरियाणा में आयोजित हुआ यह सम्मलेन पंजाबी त्रैमासिक ‘भिन्नी’ एवं हरियाणा साहित्य अकादमी के संयुक्त तत्वावधान में हरियाणा लेखिका मंच , के सहयोग से सम्पन्न हुआ ।
पहले सत्र के अध्ययक्ष मंडल में डा. मुक्ता अरोड़ा, निदेशक , हरियाणा साहित्य अकादमी , डा अनुपसिहं , उपाध्यक्ष, पंजाबी साहित्य एकादमी, सुकेश साहनी प्रसिद्ध लघुकथाकार , डा. आर. एस. सांगवान, व सुखवीर जैन थे
इस सत्र में डा कुलदीप ‘दीप’ व डा. रामकुमार घोटड ने अपने पत्र का वाचन किया जिस पर बाद में विचार विमर्श हुआ ।डा अनूपसिहं की पुस्तक ‘भिन्नी कहानी लेखकां नाल कुछ खरीआं खरीआं’,। डा. रामकुमार घोटड की पुस्तक ‘लघुकथा विमर्श व ‘मिन्नी’ के हरिशंकर परसाई विशेषांक का विमोचन किया गया।


(सम्मानित व्यक्तियों के साथ अध्यक्ष मंडल)

माता शरबती देवी स्मृतिसम्मान वरिष्ठ लघुकथाकार श्री भगीरथ , श्रीमती महादेवी कौशिक पुरस्कार - सुश्री अंजु दुआ जैमिनी, व चौधरी मोहरसिहं काम्बोज पुरस्कार डा. बलदेव सिहं खहिरा को प्रदान किया गया
द्धितीय सत्र ‘जुगनुओं दे अंग संग में 50 हिन्दी व पंजाबी के लेखकों ने लघुकथा पाठ किया तथा प्रत्येक रचना पर विचार विमर्श हुआ यह सत्र सुबह चार बजे समाप्त हुआ । इस सत्र का संचालन श्यामसुन्दर अग्रवाल व डा रमासुन्दर दीप्ति ने किया , चर्चा में मुख्यतः रामेश्वर हिमांशु कम्बोज , सुकेश साहनी, अशोक भाटिया , विक्रमजीत नूर हरभजन खेमकरनी , निरंजन बोहा ने भाग लिया।
डा. शील कौशिक व डा. रूपदेव गुण के अथक प्रयत्न से यह आयोजन सिरसा के लिए एक उपलब्धि बन गया ।

2 comments:

Harkirat Haqeer said...

इस सम्मलेन के बारे सुना था आज आपसे विस्तृत जानकारी भी मिल गई .....शुक्रिया ....!!

रवि कुमार, रावतभाटा said...

सम्मान के लिए बधाइयां...
रिपोर्ट में ्वहां व्यक्त विचार भी अभिव्यक्त होते तो ज्यादा अच्छा लगता...

आखिर पता तो चले कि कला-विधाओं में आजकल कैसा सोचा और कहा जा रहा है....