Wednesday, March 10, 2010

कानूनी किताबों के बारे में


कानूनी किताबों के बारे में

जरा ऊंची देकर पटखनी दो तब कहीं जाकर कमाई होती है,कानूनी किताबों के भरोसे कमा खाना यहॉं असम्भव है। मुवक्किल ही तुम्हारा मुर्गा है और मुवक्किल ही तुम्हारी मुर्गी तुम चाहो तो मुर्गा काट लो और तुम चाहो तो मुर्गी के अण्डे खाते रहो ,जैसा उचित समझो।

एफ.आई.आर दर्ज होते ही या गिरफतारी होते ही मुजरिम वकील की टोह लेता आपके पास आयेगा,आपका फर्ज है कि उसे बैठने को कहे,उसे पीने को पानी दें,साथ ही तसल्ली दें आवश्वस्त करें की घबराने की बात नहीं है,अभी निपटा देते है।

जैसे ही वह आस्वस्त हो उसे आई .पी .सी.के प्रावधान बताएं और तफसील से बताए,कि इस जुर्म में कम से कम तीन साल की जेल होगी हाकिम के कर्रा होने के किस्से सुनाएं। डी.वाई.एस.पी. के ईमानदार होने के वाकिए बताए। और बताए कि यह काम बहुत मुश्किल है,पुलिस पर राजनैतिक दबाव लाना होगा,हथकड़ी तो लगेगी,पुलिस रिमांड मांगेगी,हाकिम जे.सी. देगा और चार्जशीट भी पुखता तय करेगी पुलिस।

लेकिन चिंता करें,मैं जो हूं,आप निश्चिंत रहे आखिर वकालात कर रहे हैं भाड़ नहीं झौंक रहे है। फिर उसे चाय पिलाए,पीने को सिगरेट दें और उसके साथ आए लोगों को आश्वस्त करें कि आपने किस तरह इससे भी कठिन केस मुजरिम के हक में हल करवाएं है।

स्टडी में रखी हजारों किताबों की तरफ इशारा करे,एक दो खोल कर देख लें और कहें कि आपको रिलीफ मिलेगा। हालांकि कोई वकील गारंटी नहीं देता,लेकिन आप आश्वस्त रहें, मुझे पूरा विश्वास है आपको रिलीफ मिलेगा।

इतनी सुनने पर वह उबने लगेगा, उसे जल्दी है, उसे तुरन्त मुद्‌दे पर आने की जरूरत है, वह पूछेगा इसमें कितना पैसा लग जायगा। आप पूछें कि केस थाने में सलटाना है या कोर्ट में।

वकील साहब,आप थाने चलिए,पुलिस ने उसे अपनी कस्टडी में ले रखा है,पुलिस बेरहमी से मारती है वह घबड़ा जायेगा , पहले उसे देखिए बाद की बात बाद में देखेंगे। आप तुरन्त रवाना हो फोन पर थानेदार से बात करें और बताएं कि आप रहे हैं। पूछें कितने रूपये लेकर आये हो वे एक -दूसरे की तरफ देखेंगे,एक आध अपनी अंटी की तरफ देखेगा तगड़ी पार्टी होगी तो बोलेगी कितना लगेगा,आप कहें अभी पॉंच हजार दे दें बाकि की बात बाद में कर लेगें।वे तीन निकाल कर देंगे।

थाने जाएं,थानेदार से बात करें,मुजरिम के सगे से कहे,साहब के लिये ठण्डा लायें,सिगरेट का पेकेट लायें, थानेदार कर्रा पड जायेगा।मैं कुछ नहीं कर सकता आप साब से बात कर लें।

आप डी.वाई.एस.पी.की चेम्बर में जाएं कुछ और बात करें बाहर निकल कर अपने मुवक्किल के हमदर्द को बताएं ,वह बात थानेदार की पहुंच से बाहर चली गई है।इस तीन हजार से आपका काम नहीं होगा।और जेब से तीन निकालकर उनके हाथ में रख दें। वे नहीं नहीं कर ्पैसे आपको लौटा देंगे और अन्टी से दो हजार निकाल कर आपके हाथ में दे देंगे उनसे कहें आप बाहर बैठें,मैं मुजरिम से बात करूंगा,कॉंपते मुजरिम को तसल्ली दें। अभी बाहर निकलवाता हूं घर वाले खाना लेकर आएं है लेकिन पुलिसवाला उन्हें खाना नहीं देने देता है।कस्टडी में जहॉं हे वही कोने में मूत रहा हे,दुर्गन्ध रही है फिर मिलें थानेदार से चुपके से,दो हजार उन्हें दे,फिर मुजरिम को छुड़ा कर,उसके हमदर्द के हवाले कर दें,और ताकिद कर दे कि सुबह सात बजे के पहले मुजरिम फिर थाने में हाजिर हो जाएं यहॉं से पुलिस उसे कोर्ट में पेश करेगी। जब पक्की हामी भरें तो उसे जाने दे।

कस्टडी में पिटाई नहीं होती है तो उसकी रेट है,आरोपी से मिलने का भी रेट है,थाने के परिसर में घूमने की रेट चाय समोसे,सिगरेट मंगा कर खा पी सके इसके लिए जेब में पैसे रखने की छूट है मगर चार्ज है कि थाने के सभी कर्मचारी /सिपाही चाय वगैरह पीयेंगे।बिना हथकडी लगे कोर्ट में पेश होना है या हथकडी लगाकर गली - घूमाकर थाने ले जाने में जो भी पसन्द है इसकी छूट भी पुलिस देती है

कोर्ट परिसर में पॉंव रखते ही हाकिम, पी.पी.,पेशकार,बाबू,मुंशी और चपरासी सबके नाम के पैसे प्राप्त करें फिर अपनी फीस भी प्राप्त करें सबके नाम का पैसा लेने से एक फायदा यह होता है कि मुवक्किल को तसल्ली हो जाती है कि अब यह काम होगा।बताइये यह कमाई कानूनी किताबों से हो सकती है।क्या कानूनी किताबों में इस कमाई की तरफ कोई ईशारा किया गया है।

बेहतर तो यह है कि किसी न किसी हाकिम से आपकी सेटिंग हो तब प्रेक्टीस ऐसी दौड़ेगी कि ब्रेकर लगाने पर भी नहीं रूकेगी।

संगीन मामला अगर महीने में एकाध भी हाथ लग जाये तो महीनों की कमाई खरी हो जाती है। हाकिम,पी.पी और पेशकार से सेटिंग रखने के लिए मोटी पुस्तके काम नहीं आती है ही कानूनी दलीलें हकिम की त्यौहार पर भेंट पूजा करें,दावत आदि पर बुलाते रहें रोज कुछ कुछ कमाई करवायें तब आपका दबदबा और रूआब बनेगा। इतना ही नही कि आप थाने और कचहरी तक ही अपने आप को सीमित कर ले,आजकल मुखय राजनैतिक पार्टियों में आपके टाउट होने चाहिए जो आपकों केस ही लाकर नहीं देंगे बल्कि वक्त जरूरत राजनैतिक दबाव लाने में भी आपकी मदद करेंगे, राज किसी पार्टी का हो,आपको हर पार्टी अपना समझे।कई काम तों मेल मिलाप से ही निपट जाते है। खासतौर से समझोते करवानें में यह कला काम आती है और केस के फैसले तक आपको इन्तजार नहीं करना पडता,पता नहीं ऊँट किस करवट बैठे अतः समझौते करवा लो कोर्ट भी हमेशा समझोते के हक में रहती है हाकिम को फ़ैसले नहीं लिखने पडते और फाईल निपट जाती है टारगेट पूरे हो पाते और प्रमोशन लेकर उपर की कोर्ट में चले जाते है।

कानूनी पुस्तके वकील का गहना है जो मुवक्किलों पर रौब मारने के काम आता है या यू कहें उन्हें फॉंसने के काम में आता है अब मुवक्किल भी बेवकूफ नहीं रह गये है वे तहकीकात करते हैं कि कौनसे वकील की सबसे अच्छी सेटिंग है और कौन उन्हें रिलिफ दिलवा सकता है।

 

 

 

 

 

 

3 comments:

दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi said...

बाप रे बाप! जम कर पिटाई की है। मुझे तो पीठ कई दिन सिकानी पड़ेगी।

अनुनाद सिंह said...

बहुत खूब ! 'थाने की दलाली' आजकल बहुत फलता-फूलता व्यवसाय है। कभी इस पर और विस्तार से लिखिये। जब इतना लिख ही दिये हैं तो यह भी बताइये कि आम जनता के लिये इसका काट क्या है? यह ज्यादा उपयोगी होगा।

प्रदीप कांत said...

अगर दिनेशजी यानि वकील साहब भी पिटाई की बात करें तो हमारा क्या होगा?