Wednesday, March 25, 2009

युगल की लघुकथा' जूते

जूते
0 युगल
चैतू राजमिस्त्री के साथ का काम करता था । एक दिन सिर पर से ईंट उतारते समय एक ईंट पाँव पर आ गिरी । उँगलियॉ कुचल गई । पत्नि बोली - पाँव मे जूते होते तो उँगलियों नहीं कुचलती ।'' चैतू ने उँगलियॉ में उठती बिच्छु के डंक के समान टीस को दाँत पर दाँत रखकर बर्दाश्त करने की कोशिश की और बोला - "तुम्हें क्या पता कि जूते कितने महंगे हो गये हैं जब पेट चलाना ही दुशवार हो, तो जूते ……… "
पत्नी हल्दी का गरम लेप उसके पाँव पर चुपचाप लगाती रही । पेट चलाना तो सचमुच दुशवार हो रहा था । बेटा पारस बीस साल का था । बडे अरमान से पढ़ाया था । मैट्रिक पास कर गया था । इसलिए उसे मजदूरी करना अच्छा नहीं लगता था । किसी और काम की तलाश भी नहीं करता था ! गाँव के अबंडों के साथ ताश के अड्डे पर जमा रहता । चैतू को जिस दिन काम नहीं मिलता , वह नीम-बबूल के दँतवन तोड कस्बे में बेच आता। आठ -दस रूपये आ जाते । एक दिन वह जूतों की दुकान में गया था । बहुत मामूली जूतों की कीमत इतनी थी कि दो दिनों की मजदूरी सर्फ़ हो जाती । अपने जूते के लिए परिवार के लोगों को दो दिनों तक भूखे रखना………अरे, छोडो, जब इतने दिन कट गये ,तो बाकी भी कट जायेंगे । लेकिन कई रात जूते उस के सपने में आते रहे।सपने में वह अपने पाँवों में जूते डाले चल रहा होता कि उस के पाँव दूसरों के पाँवो में बदल जाते ।उन जूतों को हसरत भरी नजरों से देखता वह चलता रहता कि उस के पाँवों पर ईंट आ गिरती और आंखें खुल जाती।
चैतू की उँगलियों को कुचले दो महीने भी नहीं गुजरे थे कि एक दिन उस के तलवे में शीशे की किरच घुस गयी। खून का बहना रूकते नहीं देख पारस विचलित हो उठा । बाप को कस्बे के अस्पताल में ले गया । उस दिन उस ने शिद्दत के साथ सोचा कि बापू के पाँवो में जूते होने चाहिए । दूसरे दिन ही वह पडोसी के साथ उसी के खर्च से पंजाब चला गया। लौटा दस महीने बाद । बाप के लिए जूते ले आया था। चैतू आँगन में खाट पर लेटा था। बेटे को देख कर माँ हर्षित हुई - "इतने दिनों कहाँ रहे बेटा ! न कोई चिट्ठी ,न कोई पता -ठिकाना।" पारस ने उत्साह के साथ बाप के लिए लाये जूते निकाले । चैतू की आँखें डबडबा आयीं । माँ कुछ क्षणों तक जूते को देखती रही ।फ़िर उसने चैतू के पाँव पर से चादर हटा दी । गैंग्रिन हो जाने के कारण डाक्टर ने वह पाँव काट दिया था ।"

Sunday, March 15, 2009

गजल










चाँद शैरी की गजल
मुल्क तूफाने बला की जद में है
दिल सियासत दान का मसनद में है
अब मदारी का तमाशा छोड कर
कल वो आदमी संसद में है
एकता का तो दिलों में है मुकाम
वो कलश में हैं न वो गुम्बद में है
जिंदगी भर खून से सींचा जिसे
वो शजर मेरा निगाहे बद मे है
फिर हैं खतरे मे वतन की आबरू
फिर बड़ी साजिश कोई सरह्द में है
एक जुगनू भी नहीं आता नजर
यह अंधेरा किस बुरे मकसद में हैं
चिलचिलाती धूप में 'शेरी' खयाल
हट के मन्जिल से किसी बरगद में हैं













पुरुषोत्तम 'यकीन' की गजल

न कोई शिकवा न काम रखना
सभी से लेकिन सलाम रखना
किसी को रख लेना अपने दिल में
और उसके दिल में क़याम रखना
अमल को अपने ग़ज़ल में अपनी
मुहब्बतों का पयाम रखना
भरोसा पल का नहीं पे पल का
है लाजमी एहतिमाम रखना
नहीं, न हो,जेरे - आस्माँ घर
दिलों के भीतर मकाम रखना
तुम अपनी यादों की डायरी में
कहीं तो मेरा भी नाम रखना
जफ़ा के बदले वफ़ा मुसलसल
तू रोजो - शब , सुबहो शाम रखना
बहुत ज़माने ने कहर तोड़ा
गया न 'ईमां' न 'राम' रखना
सभी को खुल कर पिला ऐ साकी
किसी का खाली न जाम रखना
'यक़ीन' शैरो - सुखन की जद पर
अदब से दर्दे -अवाम रखना

Wednesday, February 25, 2009

एंट्रेंस टेस्ट


हमारे देश के विश्वविद्यालय बहुत प्रसिद्ध है यहाँ का एंट्रेस टेस्ट बहुत मुश्किल है । कोई शूरवीर ही टिक पाता है वरना तो टै बोल देता है। काँलेज में घुसते ही उसे सीनियर घेर लेंगे । फिर आदेश देंगे 'पतलून उतारो' !…
'नहीं उतारता' ? एक ने आकर उसके गाल मरोड़ दिये ।
'क्या चिकना है' दूसरा सीनियर आगे बढ़ता है ,
'हाथ उपर कर' , हाथ उपर करते ही उसने पतलून की चैन खोल दी । नया विद्यार्थी रुआँसा हो गया ।
'अबे छोरियों की तरह क्यों रो रहा है , चल मुर्गा बन जा' वह मुर्गा बन जाता है , तीसरा सीनियर उस पर आकर बैठ जाता है । 'अबे बोल कूकड़ू कू' । चौथे ने उसकी जांघों से एक अण्डा निकाला , 'अरे दे दिया अण्डा' । सब हो - हो कर हँसने लगे । वे उसके शरीर से छेड़छाड़ करने लगे ।
वह अपमान झेल रहा था लेकिन अन्दर गुस्से का गुबार भी उठ रहा था उसका गुस्सा फूट पड़ा ।
'अबे हिजड़ों एक - एक कर आ जाओ फिर देखो क्या कचूमर बनाता हूँ
'तो ये बात है तुझे बोलना भी आता है' एक ने थप्पड़ रसीद किया दूसरे ने चुतड़ पर लात मारी । तीसरे ने एक माँ की अश्लील गाली दी । चारों ने उसे घेर लिया
'बोल क्या बोलता है' ? गुस्सा पता नहीं कहाँ गया। विद्या ये सब सिखाती है ! विद्या ददाति विनयम उसने आप्त वचन बोल दिया ।
'तेरा बाप क्या संस्कृत का मास्टर है' वे फिर हो - हो कर हँसने लगे ।
'चल माँफी मांग '। उसने माँफी मांगी
'चल फूट '। वह वहाँ से फूट गया । वह एंट्रेस पास हो गया ।

Saturday, February 14, 2009

प्रदीप कान्त की गज़लें


प्रदीप कान्त
22 मार्च 1968 को रावत भाटा (राजस्थान) में जन्म ।
अजमेर विश्व विद्यालय से गणित में स्नातकोत्तर के पश्चात भौतिकी में भी स्नात्तकोत्तर।
कथादेश, इन्द्रपस्थ भारती, सम्यक, सहचर, अक्षर पर्व आदि साहित्यिक पत्रिकाओं व दैनिक भास्कर, राजस्थान पत्रिका, दैनिक जागरण आदि समाचार पत्रों में गज़लें व गीत प्रकाशित।
प्रगत प्रौद्योगिकी केन्द्र में वैज्ञानिक अधिकारी के पद पर कार्यरत
फोन: 0731 2320041
Email: kant1008@rediffmail.com, kant1008@yahoo.co.in



1
किसी न किसी बहाने की बातें
ले देकर ज़माने की बातें
उसी मोड़ पर गिरे थे हम भी
जहाँ थी सम्भल जाने की बातें
रात अपनी गुज़ार दें ख़्वाबों में
सुबह फिर वही कमाने की बातें
समझें न समझें हमारी मर्ज़ी
बड़े हो, कहो सिखाने की बातें
मैं फ़रिश्ता नहीं न होंगी मुझसे
रोकर कभी भी हँसाने की बातें

2
मोड़ के आगे मोड़ बहुत
रही उम्र भर दौड़ बहुत
द्वापर में तो कान्हा ही थे
इस युग में रणछोड़ बहुत
नियम एक ही लिखा गया
हुऐ प्रकाशित तोड़ बहुत
किसिम किसिम की मुखमुद्राएँ
धनी हुऐ हँसोड़ बहुत
अन्तिम सहमति कुर्सी पर
रहा सफल गठजोड़ बहुत
3


अपने रंग में उतर
अब तो जंग में उतर
सलीका उनका क्यों
अपने ढंग में उतर
दर्द को लफ़्ज़ यूँ दे
किसी के रंज में उतर
बदतर हैं हालात ये
कलम ले, तंज में उतर
अपने में ही गुम है
अपने दिले तंग में उतर

Thursday, February 5, 2009

अकबर महान








अकबर महान
भारतीय इतिहास का एक महत्वपूर्ण प्रश्न है - अकबर को अकबर महान क्यों कहते हैं ? कारण सहित उत्तर लिखो । इधर इतिहास की पुस्तकें पढकर विद्यार्थी इसका उत्तर कुछ इस तरह लिखते है।
प्रथम दृष्ट्या यह प्रश्न ही गलत है । अकबर महान नहीं हो सकता इसके कई कारण है ,पहला और अत्यंत मह्त्वपू र्ण कारण यह है कि वह एक मुस्लिम शासक था उसके पूर्वज अन्य देशों से आए थे उन्होंने भारत को गुलाम बनाया था।
दूसरा कारण यह कि वह महाराणा प्रताप का नम्बर एक दुश्मन था महाराणा प्रताप परमवीर देशभक्त थे और ता-जिन्दगी अकबर से जूझ ते रहे । महाराणा प्रताप हमारे राष्ट्रीय नेता है इस हिसाब से देखे तो महाराणा का दुश्मन कैसे महान हो सकता है ।
तीसरा कारण यह है कि वह बेपढा -लिखा था
चौथा कारण यह था कि वह साम्राज्यवादी था और उसे रात-दिन अपने साम्राज्य की चिंता थी साम्राज्यवादी कभी महान नहीं हो सकता।
वह एक तानाशाह था जिसने हुस्न की मलिका अनारकली को जिंदा दीवार में चुनवा दिया ,वह सामाजिक न्याय का परम शत्रु था , गैर बराबरी का हिमायती , तभी तो कनीज अनारकली के साथ सलीम का निकाह नहीं करवाया ।
अन्तिम कारण यह है कि उसने कई शादियों रचवाई बादशाह सलामत ने अय्याशी करने और इमारतें बनवाने के अलावा कुछ नहीं किया ,इसलिए अकबर को महान शासक नहीं कहा जा सकता ।

Wednesday, January 21, 2009

गोविन्द गौड की गज़लें


गोविन्द गौड की गज़लें

हो रहा है क्या गज़ब इधर ये जंग की तरह
बह रहा है यहां लहू भी क्यों रंग की तरह
हाय क्यों मचा हुआ है शोर मार-काट का
कुछ न कुछ पिये हुये हैं लोग भंग की तरह
बीच शहर आज उसका बुत खडा हुआ मिला
लाश जिसकी कल मिली थी एक नंग की तरह
किस कदर बाजार भाव बेलगाम हो गये
कुदते हैं फ़ांदते हैं अब तुरंग की तरह
हाथ में लिये हुये मशाल चल पडा हूं मैं
और रास्ता है आतिशी सुरंग की तरह
दुखभरी यह जिंदगी तो हमने ही कुबूल कि
वो है खुशनसीब जो जिया मलंग की तरह
2
आपके शहर में आकर बडा हैरान हूं मैं
सच के दामन में लिपट कर परेशान हूं मैं
लोग रहने नहीं देते मुझे इन्सान ही क्यूं
देवता कहते, कभी कहते हैं शैतान हूं मैं
चाहता हूं,रहूं अपने खयाले-हाल में ही
सोचता हूं मगर खुद से बहुत अनजान हूं मैं
जानते हो जिन्दा हूं बनकर फ़कत खिलौना
लाश की तरह यूं तो अलफ़ बेजान हूं मैं
आदमी बनकर ही रहने की है फ़ितरत मेरी
आगया जिद पे तो देखोगे कि अरमान हूं मैं
आप क्या कीजियेगा जानकर पहचान मेरी
मैं तो इन्सान हूं, हिन्दू न मुसलमान हूं मैं




Tuesday, January 6, 2009

छात्रों के लिए प्रश्न पत्र


व्यंग्य
छात्रों के लिए प्रश्न पत्र

नोट - पहला प्रश्न अनिवार्य है । सही उत्तरों को टिक मार्क करों।

1 बताओं तुम्हें कैसी लडकी पसंद नहीं है ?
(a) सुन्दर ,पढी-लि्खी ,साहसी ,हाजिर जवाबी जो ईंट (ताने) का जवाब पत्थर से दे सके ।
(b) ऐसी सुन्दर , सुशील व चतुर लडकी , जो सास और ननद की नाक में नकेल डाल सके।
(c) ससुराल वाले हाथ-पांव चलाए तो उनके हाथ-पांव तोड दे और थाने में रपट लिखाकर उन्हें गिरफ़्तार करवाए।)
(d) उपरोक्त सभी
2 बताओं तुम्हें कैसी लडकी पसंद है ?
(a) ड्राईंगरुम में सुसंस्कृत गृहणी लगे।
(b) डाईनिंग रुम में स्वादिष्ट व्यंजन परोसे।
(c) बेडरुम में बिंदास बाला हो ।
(d) उपरोक्त सभी
3 जब आप विवाह योग्य हो और बेरोजगार हो तो व्यवसाय में लगने का सबसे सरल तरीका ईजाद करो।
उत्तर न आता हो तो नीचे दिया गया संकेत पढो।
वैवाहिक विज्ञापन 'सभ्य कायस्थ परिवार के 24 वर्षीय सुन्दर लडके को ऐसी वधू की आवश्यकता है जिसका परिवार वर को घर जंवाई के रुप में रखना चाहता हो और उसकी सेवाओं का उपयोग व्यापार में लेना चाहता हो इच्छुक पार्टी तुरंत संपर्क करे ।
4 अगर तुम्हारी पत्नी को लेकर तुम्हारे माँ बाप तुम्हें ताने कसे तो तुम क्या करोगे । सही उत्तर पर टिक लगाओ
अ) चुटिया पकड ,घसीट्ते हुए माँ के कदमों मे ले आओगे ।
ब) दो चार चाँटे रसीद कर उसे उसकी औकात बताओगे ।
स) उसे उसके पीहर भेज दोगे और दूसरे विवाह की धमकी दोगे ।
द) गुस्से में आकर पत्नी का गला दबा दोगे ।
5 वधू को गला दबाकर मारने से आपको क्या नुक्सान हो सकता है जानते हो तो लिखों । न जानते हो तो जानने की कोशिश करो अगर फ़ायदा होता हो तो उसकी भी जानकारी प्राप्त करो । यह ज्ञान जीवन में काम आएगा।
6 ससुराल से तुम्हे लेने ही लेने का हक क्यों है ? और संविधान की कौन सी धारा में यह प्रावधान है।
7 क्या तुम जानते हो कि दहेज मांगना, वधू को यातना देना या उसे मार देना संगीन अपराध है इसके बावजूद लोग परवाह नहीं करते। तुम करते हो तो डरपोक हो। हो या नहीं, बताओं ।शोध कार्य कर उन कारणों का पता लगाओ जिसकी वजह से लोग बेधडक ऐसे अपराध कर जाते है और उनका बाल भी बाँका नहीं होता। पुलिस न्यायालय, और वकीलों की भूमिका का भी पता लगाओ।
8 तुम्हें नौकरी करने वाली पत्नि नहीं चाहिए क्योंकि-
1 औरत की कमाई खाना पाप है।
2 औरत का दहलीज लांघना परम्परा के विरूध्द है ।
3 औरत का कोई भरोसा नहीं किसी के साथ गुलछर्रे उड़ा सकती है ।
9 तुम्हे नौकरी वाली पत्नि चाहिए क्योंकि :-
1 समाज में आपकी प्रतिष्ठा बढ़ेगी
2 घरेलू कामकाज के अलावा परिवार की आमदनी भी बढ़ जाती है
3 अन्य ईर्ष्या से जलेंगे तो तुम्हे खुशी होगी
10 अगर वो तुम्हे और तुम्हारे परिवार को अपनी कमाई न दे तो तुम क्या करोगे
1 बहला फुसला कर रुपये ऐंठते रहोगे
2 बहाने बनाकर पैसे ले लोगे , जैसे कर्जा चुकाना है
3 धमका कर पैसा लोगे
4 फिर भी पैसा न दे तो आर - पार की लड़ाई लड़ोगे
11 अगर पत्नि अपनी कमाई को
1 अपने भाई की पढ़ाई पर खर्च करना चाहे
2 अपनी बहन की शादी पर खर्च करना चाहे
3 अपने पिता के इलाज पर खर्च करना चाहे
तो तुम्हे कैसा लगेगा ? बिना हिचक उत्तर दो ।
12 अगर पत्नी से पहली संतान लड़की हो और वह दूसरी संतान न चाहे तो तुम कया करोगे ?
1 उसका समर्थन करोगे
2 दूसरी संतान के लिए राजी करोगे
3 दूसरी संतान लड़की हुई तो …? इस प्रश्न का तुम्हारे पास क्या जवाब होगा ?
13 व्यापार में घाटा हो , व्यापार में और पूंजी लगानी हो तो वह आसानी से कहाँ से उपलब्ध हो सकती है ।
सीधी ऊंगली और टेढ़ी ऊंगली की तर्ज पर दो रास्ते तजवीज करो । अपनी कल्पना शक्ति का उपयोग करो या दूसरों के अनुभव से सीखो ।
14 ससुराल से तुम्हे लेने ही लेने का हक क्यों है ? और संविधान की कौनसी धारा में यह प्रावधान है ?

Monday, December 22, 2008

छात्राओं के लिए प्रश्नपत्र



नोट- किन्ही दस प्रश्नो के उत्तर दो। अन्तिम प्रश्न अनिवार्य है ?
1 कभी-कभी रसोईघर में स्टोव क्यों फट जाता है और उससे बहुएँ ही क्यों जलती है । घबराएँ नहीं , और सही उत्तर दें ?
2 कई बार ऐसा होता है कि ससुराल मे बहू की लाश पंखे से झूलती नजर आती है; क्यों? यह सीन आप में डर पैदा करता है या क्रोध. कारण सहित उत्तर दो ।
3 अक्सर ऐसा होता है कि बहू की पीठ पर निशान नजर आते है। ये निशान किस के घोतक है ? इसका इलाज बता सकते हो तो बताओ।
4 ससुराल वालों के ताने सुनने में जो बहू दक्ष होती है यानि सुनी को अनसुनी कर देती है, फायदे मे रहती है इस बारे में आपकी राय क्या है, स्पष्ट लिखो ।
5 जो बहुएँ अपमान सह सकने की हिम्मत रखती है उन्हें हम साहसी महिला कहेंगे । सही या गलत ।
6 बहू को ससुराल में सम्मान कब मिलता है? जब वे अपने साथ ,,,,,,,,,,,, लाएँ । खाली जगह भर कर बताओ कि बहुओं को ससुराल में सम्मान मिलता भी है या नहीं ।
7 बहू के लिए सबसे बडा विलेन कौन होता है ? पति,सास,ससुर,ननद, देवर या जेठ ।
8 क्या कारण हैं कि सास बहुओं के आगे झूठे बर्तनों और गंदे कपडों का ढेर लगा देती है और दिन में तीन बार पौंछा लगवाती है?
9 पति नाम का जन्तु अक्सर घुग्घु क्यों बन जाता है , कारण सहित उत्तर दो ।
10 सास ,ससुर ,देवर,ननद और पति के पारिवारिक सहयोग का एक क्रूर व वीभत्स उदाहरण दो।
नहीं मालूम हो तो अखबार पढो ।
11 विवाहोपरांत अगर तुम्हारे साथ कोई हादसा हो जाय तो तुम ससुरालवालो या पीहर वालो को कोसोगी या कोई कदम उठाओगी । बताओ वह कदम कौन सा होगा ?
12 नारियों से संबंधित जितने कानून है वे सरल रुप में दसवीं के कोर्स में लगाए जाएँ अथवा अशोक महान और शाहजाहाँ को ही पढा जाय । अपने विचार लिखो ।
13 कौन सा लडका तुम्हारी पहली पसंद होगा 1) इंजीनियर 2) अध्यापक 3) क्लर्क ,4दहेज विरोधी । निस्सकोंच जवाब दो । साथ में यह भी बताओं की सबसे हाइ रेट किस की होगी?
१४ घर में गैस के दो-दो कनेक्श्न होने पर भी राशन कार्ड पर सास मिट्टी का तेल क्यों मंगवाती है।

Sunday, December 14, 2008

ग्लोबल विलेज

गाँधीजी के आर्थिक स्वराज का सपना अब साम्राज्यवाद की गोद में खेल रहा है हमें बताया जा रहा है कि इस देश की समस्याएँ साम्राज्यवाद ही हल कर सकता है । क्योंकि 21 वीं सदी में साम्राज्यवाद ने मानवीय चेहरा प्राप्त कर लिया है। पूँजीवाद की विश्व विजय को वैश्वीकरण कहा जा रहा है इसका नेतृत्व जी-8 के देश कर रहे है, इन देशों का सिरमौर संयुक्त राज्य अमेरिका है । विश्व बैंक , अन्तर्राष्टीय मुद्राकोष और विश्व व्यापार संगठन के जरिये जी-8 के देश पूरे विश्व में मुक्त विचरण (व्यापार) की सुविधा के लिए दबाव बना रहे है , विदेशी पूँजी ,विदेशी तकनीक ,विदेशी कर्ज और विदेशी वस्तुएँ भारत को कुछ ही वर्षो में जापान बना देगी और फ़िर अमेरिका ,बस उन्हे थोडी सुविधाएँ दीजिए ,उनकी सलाह (शर्ते) मानिए प्रतिबन्ध हटा लीजिए फ़िर देखिए भारत स्वर्ग की सीढियाँ चढने लगेगा इस ग्लोबल विलेज में सबके लिए सुख -सुविधा होगी ,गरीबी, बेरोजगारी व अभाव विश्व के नक्शे से मिट जायेंगे एक नयी सभ्यता करवट लेगी। मुक्त बाजार के पैरोकारों का यह सपना सचमुच पूरा होने वाला है ,बस इनका मार्च मत रोकिए ।
लेकिन हमारी जी-8 के देशों से एक ही विनती है कि हमने तो प्रतिबंध हटा ही लिए है और बाकी बचे भी आज नहीं तो कल हटा ही लेंगे ,लेकिन आप भी तो अपने देश में हमारे प्रवेश पर लगे प्रतिबंध हटाएँ , श्रम को भी तो मुक्त विचरण करने दें , फ़िर देखते हैं विश्वविजयी तिरंगा प्यारा कहाँ-कहाँ नहीं फ़हराता तब 2 अक्टूबर के दिन आर्थिक स्वराज्य का सपना हम भारत में नहीं जी-8 के देशों मे देखेंगे । आमीन्

Saturday, November 29, 2008

सबसे बड़ा शहीद

भारत में ऐसे नेता है , जिन्हें महात्मा गांधी को राष्ट्रपिता कहा जाना कुछ हजम नहीं होता , उनका कहना है - भारत माँ है , गाँधी तो उसके सपूत थे , पिता होने का प्रश्न ही कहां है ? वे पक्के हिन्दू थे और मुसलमानों का पक्ष लेते थे , इसलिए गोड़से उनसे बहुत नाराज रहा करता था लेकिन गोड़से अंग्रेजों से नाराज नहीं था , महात्मा गाँधी से नाराज था , वह देशभक्त था और देश के लिए उसने राष्ट्रपिता की जान ले ली और बदले में फाँसी पर झूल कर शहीद हो गया आज भी उसके कई हमखयाली उसकी शहादत से तुलना करते हैं यह देश भक्ति भी कितनी कुत्ती चीज है कि राष्ट्रपिता को गोली मारकर देशभक्त कहलाया जाए , आज भी ऐसे देशभक्त हैं , जो गोड़से को ठीक मानते हैं , बल्कि बिल्कुल ठीक मानते हैं अगर ऐसे देशभक्तों के हाथों मे सत्ता आ गई तो गोड़से सबसे बड़े देशभक्त व शहीद माने जायेंगे , हो सकता है कुछ सालों बाद संसद में उनके चित्र का अनावरण भी हो ।

लोकतंत्र के कलाकार


भारत में लोकतंत्र के सूत्रधार गाँधीजी थे । इसलिए सरकार के सभी कार्यालयों में महात्मा गांधी की तस्वीर लगी है गांधीजी का विश्वास था कि यहां के सांसद, विधायक, मंत्री , मुख्यमंत्री , राष्ट्रपति आदि ढाई आने गज की खादी पहनेंगे । यही नहीं वे यह भी उम्मीद करते थे कि वे दो - चार घंटे सूत और उसी का धोती कुर्ता बनवा कर पहनेंगे । वे देश के आदर्श नागरिक होंगे जो दरिद्र नारायण और देश की सेवा में जुटे रहेंगे जिनके जीवन का ध्येय ही गरीबों का कल्याण होगा वे सादा जीवन , सादा भोजन और सादा निवास अपनायेंगे ।
लेकिन यह जरुरी तो नहीं कि जब पात्र मंच पर आयें तो वे सूत्रधार के अनुसार ही चले , पात्र कठपुतली तो है नहीं कि सूत्रधार की अंगुलियों पर नाचें । फिर ये तो जीवित पात्र थे , हाड - माँस के पुतले , इनकी अपनी महत्वाकांक्षाएं थी , इनके अपने परिवार थे , नाते - रिश्तेदार थे , पुत्र - पुत्रियाँ थीं , जिनकी अपनी आकांक्षाएं थी । ऊँचे लोग ऊँचे लक्ष्य । लक्ष्य को आँख से ओझल मत होने दो । गांधीजी की तरह , लक्ष्य साधने में साधन और साध्य का विवाद मत लाओ , साधन को भूलो , साध्य को साधो , जायज - नाजायज का चक्कर छोड़ो मंच तुम्हारा है , जो चाहो सो दिखाओ , जनता को तो अन्तत: तालियाँ बजाना ही है ।
लोकतंत्र का कलाकार जानता है , वोट हासिल करना कितना मुश्किल है , लोगों को तोड़कर, तो कहीं जोड़कर , तो कहीं जोड़ - तोड़ कर वोट प्राप्त करने होते हैं , एक - एक सीट के लिए 50-50 लाख का दाँव लगाना पड़ता है और वेतन क्या मिलता है ? लोकतंत्र के कलाकार का वेतन - भत्ता भरपूर होना चाहिए ताकि वे लोकतंत्र में अपनी भूमिका ठीक तरह से निभा सके अबकि बार संसद इस मामले मे एक हो गई और उन्होनें अपने लिए इतने वेतन - भत्ते और पेंशन तय किये कि जीते जी कम नहीं पड़ेगी जब यह बिल संसद मेरे पास हुआ तो विपक्ष में एक भी वोट नहीं पड़ा । राष्ट्रीय एकता का अप्रतिम उदाहरण देखकर दीवार पर टंगे महात्माजी ने अपना चश्मा उतार , आँखे पौंछी और फिर चश्मा लगाकर यथावत फ्रेम मे फिट हो गये ।

Friday, November 7, 2008

रघुनाथ मिश्र की गजल



रघुनाथ मिश्र की गजल

कितने हो गये तबाह, हम तलाशेंगे ।
चश्मदीद कुछ गवाह हम तलाशेंगे ।
ठिठुर रहे हैं सर्द रात में, असंख्य जहाँ ,
वहीं पे गर्म ऐशगाह , हम तलाशेंगे ।
यहाँ ये रोज भूख - प्यास महामारी है ,
वहाँ पे क्यों है वाह -वाह , हम तलाशेंगे ।
खुलूस -ओ - प्यार की आबोहवा जहरने में ,
उठी है कैसे यह अफवाह , हम तलाशेंगे ।
जिन बस्तियों ने हर खुशी बाँटी उनमें ,
ठहरी है क्यों कराह, हम तलाशेंगे ।
बहते हुए दरिया का अचानक यूं ही ,
ठहरा है क्यों प्रवाह हम तलाशेंगे ।
चश्मदीद :- आखों देखा , ऐशगाह :- ऐयाशी की जगह , खुलूस -ओ - प्यार :- प्यार भरी सच्चाई , आबोहवा :- जलवायु

रघुनाथ मिश्र की गजलें





रघुनाथ मिश्र की गजलें
1
मुल्क की हालत , बड़ी गम्भीर है।
प्रश्नचिन्हों में घिरी , तस्वीर हैं ।
चल रहीं हैं , बे-नियंत्रित आँधियाँ,
गर्दनों पे घूमती , शमशीर है ।
आम जन हैं, हसरतों में मौत की,
जिंदगी कुछ खास की जागीर है।
मंजिलों की ओर बढ़ते पाँव को ,
रोकती वर्चस्व की , जंजीर है ।
उग रहे हैं भूख के , जंगल घने ,
मौसमों में दर्द की , तासीर है ।
आरजूएँ लुट गई , इन्सान की ,
चन्द सिक्कों में बिकी तदबीर है॥
शमशीर :- बीच में झुकी हुई तलवार , वर्चस्व :- तेज , प्रबलता , तदबीर :- उपाय , युक्ति

Wednesday, October 22, 2008

अरविंद सोरल की गजल



अरविंद सोरल की गजल

सिक्के हवा में देखिए यूं न उछालिए
जलते हुए सवाल हैं ऐसे न टालिए ।

ढाल की व्यवस्थाएं चरमरा गई ,
खंजर उठाइये या गर्दन निकालिए ।

इस चमन में आपने बोये थे कुछ बबूल ,
हो सके तो अब जरा दामन संभालिये ।

अब हमारी चाल भी तो देखिये हुजूर !
आपने तो दाँव अपने आजमा लिये ।

हमारे हाथ बढ़ चुके हैं नोचने नकाब ,
क्या हुआ जो आपने चेहरे छिपा लिए ।

बेशक हमारे खून को चूसा गया मगर ,
बाकि है अगर एक भी कतरा उबालिए ।



शकूर अनवर की गजल



शकूर अनवर की गजल


हवाओं से बहुत लड़ना पड़ेगा ,
समंदर का सफर महंगा पड़ेगा

सजा लो अपनी दीवारें सजा लो,
गरीबों का लहू सस्ता पड़ेगा

चलो सर्पीली राहों से निकल लें
ये सीधा रास्ता लम्बा पड़ेगा ।

अभी उस बेवफा से कुछ न कहना,
वो सबके सामने झूठा पड़ेगा ।

मेरे उड़ने की कोई हद नहीं है
मुझे ये आसमां छोटा पड़ेगा

समन्दर से अगर मिलना है 'अनवर'
नदी के साथ ही बहना पड़ेगा ।