पेट सबके हैं
वरिष्ठ कथाकार भगीरथ
की चुनिऺदा
लघुकथाओऺ का सऺग्रह
भगीरथ
समर्पण
Ø वेद प्रकाश अमिताभ
Ø राधेलाल बिजघावने
Ø सतीश राठी
Ø पुरुषोत्तम दुबे
Ø उमेश
महादोषी
और
Ø ‘पड़ावऔरपड़ताल’ शृंखला के शिखर पुरूष
Ø मधुदीप को
इस पुस्तक पूरी यहाँ दी जायगी. एक एक पोस्ट
पेट सबके हैं
B.D.
Complex, Near Tifra Over Bridge, Bilaspur, Chhattisgarh, India, 495001
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writer.
ISBN:
Book: Fiction
First Edition Published by
Booksclinic Publishing 2020
Copyright ©Bhagirath2020
Price: Rs.
छोटी कथाओं की बड़ी बात 15
शिलान्यास –अशोक मिश्र
हरिजनों के आवास के लिए
बनायीं गई ‘इंदिरा आवास कॉलोनी’ बाढ़ का एक धक्का भी न झेल पाई और अब वहां पर किसी
ईट पत्थर का नामोनिशान तक न रह गया था. फिर भी वहां पर एक दीवार खड़ी थी अपनी पूरी
मजबूती के साथ. बाढ़ भी जिसका बाल बांका न कर सकी थी. वह थी शिलान्यास के
पत्थरवाली दीवार. जिस पर लिखा था-प्रधानमंत्री द्वारा उद्घाटित देश की
खुशहाली एवं तरक्की के लिए.
आँखें –अशोक मिश्र
निर्दोष युवक को जब फांसी होने लगी तो जेलर ने उसकी अंतिम इच्छा पूछी, “तुम्हारी मरने से पूर्व कोई अंतिम इच्छा हो बताओ!” “क्या आप पूरी कर सकेंगे ?”
छोटी कथाओं की बड़ी बात -13

गाँधी भक्त बन्दर- गिरीश पंकज
देश आजाद हुआ, तो गांधीजी ने अपने तीनों बंदरों से कहा- ‘जाओ देश सेवा करो, मगर ध्यान रहे, बुरा मत करना, मत कहना और मत सुनना.’ तीनों ने गांधीजी का कहना माना और बुरा करने, देखने एवं सुनाने के लिए निजी सहायक रख लिए और निश्चिन्त होकर राजनीति करने लगे.

जेंटलमेन प्रोमिस- गिरीश पंकज
पिछले साल की तरह इस बार भी ‘वे’ बाढ़ की तबाही का हवाई सर्वे कर रहे थे। लोग बह रहे हैं, मरे पड़े हैं, घर डूब गए है। ऊपर से ऐसे दृश्य निहारो,
तो बड़ा रोमांचक होता है. मीडिया के सामने आंसू बहा कर वे घर पहुंचे
तो पत्नी बोली, ”आप बड़े वो हैं। इस बार भी अकेले-अकेले उड़ गए”। बच्चे बोले, ”हम भी एन्जॉय करते पॉप”। महोदय ने शरमाते हुए कहा, ”अरे, डोंट बादर, तबाही तो आती रहती है। अगली बार साथ-साथ
चलेंगे। इट इज जेंटलमेन प्रोमिस।”
संतुष्ट हो कर पत्नी लेडीज़ क्लब के लिए निकल गयी और बच्चे ‘लाँगड्राइव’ पर।
पार्क की बेंच पर बैठे एक सेठ, अपने पालतू 'टॉमी' को ब्रेड खिला
रहे थे। पास ही गली का एक आवारा कुत्ता खड़ा दुम हिला रहा था।
बिट्टू के पिताजी के विद्यालय जाने के समय ही
किसी कार्यवश उनकी पड़ोसन आ गई | ‘आज
बिट्टू के पापा अवकाश पर हैं क्या?’ पड़ोसन ने बिट्टू की माँ से सवाल किया | ‘नहीं तो |विद्यालय जाने के लिए ही निकले
हैं|” बिट्टू की माँ ने कहा | ‘आज खाली हाथ जा रहे हैं? लंच बॉक्स नहीं लिए हैं ?’ पड़ोसन ने एकसाथ दो
सवाल दाग दिए| 'जब से विद्यालय में सरकार ने छात्रों के लिए दोपहर में भोजन की
शुरुआत की है, उन्होंने लंच बॉक्स ले जाना बंद दिया है|’ पड़ोसन को आश्वस्त करती
बिट्टू की माँ ने कहा|
सार्वजनिक कार्यालय में
काउंटर पर कर्मचारियों की लम्बी कतार. किसी के सामने पट्टिका नहीं. न जाने इनमें
रत्ना कौन है. पूछने पर एक कर्मचारी ने बताया, पकौड़े-सी नाक, बिल्ली की सी आँखें,
हाथी के से कान और ऊंट के से होंठों वाली महिला रत्ना है. मैं कुछ आगे बढ़ी. दिमाग में बिल्ली, ऊंट, हाथी के चित्र बनने –बिगड़ने लगे
तो झुंझलाहट हुई.एक अन्य कर्मचारी से पूछताछ की. उत्तर मिला, “सबसे भोली सूरतवाली
स्त्री को रत्ना समझिए.” मस्तिष्क में रह-रह कर प्रश्न उठ
रहा था. रत्ना के बहाने इन दोनों ने अपनी पहचान नहीं बता दी?